Bulbule

Baaton ke bulbule kucch idhar se uthe
Badhte badhaate auron se jude
Bante bigarte, Milte milaate,
Bachte bachaate, hanste rulaate,
Kisi tarah se kucch baat ban jaate.

Hawa ke bane
Hawa se hi dhwast
Na parwah anhoni
Hone par hai mast

Is bulbule par baithe kaise
Vo jo dil hai chaahta
Lehron ke sawaar jaane
Sab lehar mein samaata

Bulbula hi tha, kya yeh bachaata
Ya phir kahaan thaanv tak pahunchaata
Lehar se judo, lehar sang chalo
Bulbule ke bhuleke se bach ke raho

बातों  के  बुलबुले  कुच्छ  इधर  से  उठे
बढ़ते  बढाते  औरों  से  जुड़े
बनते  बिगारते , मिलते  मिलाते ,
बचते  बचाते , हँसते  रुलाते ,
किसी  तरह  से  कुच्छ  बात  बन  जाते .

हवा  के  बने
हवा  से  ही  ध्वस्त
न  परवाह  अनहोनी
होने  पर  है  मस्त

इस  बुलबुले  पर  बैठे  कैसे
वो  जो  दिल  है  चाहता
लहरों  पे  सवार  जाने
सब  लहर  में  समाता

बुलबुला  ही  था , क्या  यह  बचाता
या  फिर  कहाँ  ठांव  तक  पहुंचाता
लहर  से  जुडो , लहर  संग  चलो
बुलबुले  के  भुलेके  से  बाख  के  रहो

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