Dohas Comment

Aisi baani boliye, jo chhape darshe baar baar

Chubhe, lage to kya hua, lanchaan apna daarh (oar)

 

 

Na samjho voh samjha nahi, ho samajh samajh ka pher

Sachwani sunte sabhi, asar hota der saver

 

 

Halka phulka boliyo, varna sune na koi

Vaar se katein sabhi, bhaar adhik roz hoi

 

 

Dil mein bojh liye chalein, rozi roti ban paaye

Taak dekhein khidki khole, to jeena dushwar ho jaaye

 

 

Kheloon khel tumhaara jo, jeet mile ya haar

Apna khel banai ke, sar sar beda paar

 

 

Main na boloon chup rahoon, chuppi saadhein sab

Jungle bana bagaan ka, Ber khaoge tab

 

 

Maana maanta koi nahin, sabhi phase us chhor;

Man maane kaise bhala, jab pet pe jeb ka zor.

 

 

Bada hua to kya hua, Oocha agar vyavhaar

Saans nahin sanskaar mein, phoonk phoonk vyapaar

 

 

Bojh itna uthaye kaun, dekh ke hi man roye

Vahi khayegi santati jo hum aaj hai boye

 

 

ऐसी  बानी  बोलीये , जो  छपे  दर्शे  बार  बार

चुभे  लगे  तो  क्या  हुआ , लांछन    अपना दाढ़

(oar)

 

 

न  समझो  वोह  समझा  नहीं , हो  समझ  समझ  का  फेर

सच्वानी  सुनते  सभी , असर  होता  देर  सवेर

 

 

हल्का  फुल्का  बोलियों , वरना  सुने  न  कोई

वार  से  कटें  सभी , भार  अधिक  रोज़  होई

 

 

दिल  में  बोझ  लिए  चलें , रोज़ी  रोटी  बन  पाए

ताक  देखें  खिड़की  खोले , तो  जीना  दुश्वार  हो  जाए

 

 

खेलूँ  खेल  तुम्हारा  जो , जीत  मिले  या  हार

अपना  खेल  बने  के , सर  सर  बेडा  पार

 

मैं  न  बोलूँ  चुप  रहूँ , चुप्पी  साधें  सब

जंगले  बना  बगान  का , बेर  खाओगे  तब

 

माना  मानता  कोई  नहीं , सभी  फसे  उस  छोर ;

मन  माने  कैसे  भला , जब  पेट  पे  जेब  का  ज़ोर .

 

बड़ा  हुआ  तो  क्या  हुआ , ओछा  अगर  व्यवहार

सांस  नहीं  संस्कार  में , फूँक  फूँक  व्यापार

 

 

बोझ  इतना  उठाये  कौन , देख  के  ही  मन  रोये

वाही  खाएगी   संतति  जो  हम  आज बीज  है  बोये

 

(c) Meeta Sengupta

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3 thoughts on “Dohas Comment”

  1. Aa toh super chey !
    दाेहा दाेहा हर काेई लिखे हर दाेहा मन भाय ।
    समझन में कछु देर लगे चक्षुन नीर भर जाय ।।

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